नई दिल्ली: 'श्रम संवाद' पहल के जरिए ओखला इंडस्ट्रियल एस्टेट में श्रम संहिताओं पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों को नई श्रम संहिताओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए एक जिला-स्तरीय क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया।

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने फिक्की (FICCI) तथा शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के सहयोग से नई दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एस्टेट में 'श्रम संवाद' नामक जिला-स्तरीय क्षमता विकास एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों को 21 नवंबर 2025 को लागू हुई श्रम संहिताओं और 8 मई 2026 को अधिसूचित केंद्रीय नियमों के बारे में जानकारी देना था। साथ ही, इसमें नए ढांचे के मुख्य प्रावधानों और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें नियोक्ता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, एचआर पेशेवर, विधि और वित्त विशेषज्ञ तथा श्रम एवं रोजगार इकोसिस्टम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल थे। उद्घाटन सत्र को श्रम और रोजगार मंत्रालय के निदेशक डॉ. पी. के. जेना और शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की मैनेजिंग पार्टनर एवं एग्जीक्यूटिव कमिटी सदस्य सुश्री पल्लवी श्रॉफ ने संबोधित किया। सत्र का संचालन शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर सुश्री पूजा रामचंदानी ने किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। पहले सत्र में डॉ. पी. के. जेना ने श्रम संहिताओं के उद्देश्यों और नए विधायी ढांचे के तहत किए गए प्रमुख सुधारों के बारे में जानकारी दी। दूसरे सत्र का संचालन श्रम प्रवर्तन अधिकारी मो. नदीम ने किया, जिसमें नियोक्ताओं के वैधानिक दायित्वों और नियमों के अनुपालन पर व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।
तीसरे सत्र में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I श्री मनीष कुमार सिंह ने 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY)' के उद्देश्यों, पात्रता शर्तों और रोजगार सृजन में इसके लाभों के बारे में बताया। चौथे सत्र में कल्याण प्रशासक श्री संदीप चौरसिया ने 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना' की विशेषताओं और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जहाँ प्रतिभागियों ने श्रम संहिताओं, नियोक्ता अनुपालनों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े अपने सवालों के स्पष्टीकरण प्राप्त किए। यह आयोजन नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों के बीच श्रम संहिताओं की समझ विकसित करने और उनके प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच रहा।

