नशा मुक्ति केंद्र की सहायता से दारा सिंह ने शराब की लत को हराया, अब आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं
राजस्थान के दौसा जिले के एक व्यक्ति ने डीडवाना स्थित एकीकृत पुनर्वास केंद्र के माध्यम से शराब की लत से छुटकारा पाया और पुनः गरिमापूर्ण जीवन की शुरुआत की है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नशे की लत से उबरने की एक प्रेरक कहानी साझा की है। राजस्थान के दौसा जिले के 29 वर्षीय दारा सिंह (परिवर्तित नाम) ने डीडवाना स्थित नशा मुक्ति केंद्र, जो नशा पीड़ितों के लिए एक एकीकृत पुनर्वास केंद्र है, से उपचार और पुनर्वास सहायता प्राप्त कर वर्षों पुरानी शराब की लत को मात दी है।
शराब पर निर्भरता के कारण दारा सिंह का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। वे भावनात्मक अस्थिरता, तनाव और आत्मसम्मान में कमी महसूस कर रहे थे। इसका असर उनके परिवार पर भी पड़ा, जिसे आपसी विवाद, सामाजिक कलंक और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा। परिवार के संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अस्थिर हो गई थी और समुदाय के साथ उनके संबंध खराब हो गए थे।
इन परिस्थितियों के बीच, परिवार के सहयोग से दारा सिंह को डीडवाना के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया। यहाँ उन्होंने केंद्र की दिनचर्या का पालन करते हुए परामर्श सत्रों, योग, चिकित्सकीय देखभाल और पुनर्वास गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। दैनिक परामर्श और व्यवहार संबंधी मार्गदर्शन ने उन्हें नशे के दुष्प्रभावों को समझने और स्वस्थ आदतें विकसित करने में मदद की।
उपचार पूरा होने के बाद दारा सिंह के स्वास्थ्य और व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। उन्होंने पूरी तरह से शराब का त्याग कर दिया और अपने पारिवारिक संबंधों को पुनः स्थापित किया। उन्होंने अपना स्वरोजगार फिर से शुरू कर दिया है, जिससे वे प्रतिदिन लगभग 500 रुपये कमा रहे हैं। यह आय उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और परिवार में योगदान देने में सक्षम बना रही है।
अपने अनुभव साझा करते हुए दारा सिंह ने कहा, “उपचार और परामर्श ने मुझे शराब छोड़ने और अपना जीवन फिर से शुरू करने की शक्ति दी। आज मैं स्वस्थ हूं, अपने परिवार के लिए कमा रहा हूं और गरिमा के साथ जीवन जी रहा हूं।”
यह मामला दर्शाता है कि समय पर पेशेवर उपचार, परामर्श, पारिवारिक सहयोग और निरंतर पुनर्वास सहायता के माध्यम से नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों पर निर्भरता से उबरकर एक उत्पादक और गरिमापूर्ण जीवन में वापस लौटा जा सकता है।