पीएमजीएसवाई चिंतन शिविर: ग्रामीण सड़कों के लिए तकनीक और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत गुणवत्ता, रखरखाव और आधुनिक तकनीक के उपयोग के जरिए ग्रामीण संपर्क सुविधा को मजबूत करने की रूपरेखा तैयार की गई।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का दो दिवसीय चिंतन शिविर 5-6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण सड़क संपर्क सुविधा को मजबूत करने के लिए भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करना था। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और ज्ञान साझेदारों ने हिस्सा लिया।
पिछले 25 वर्षों में पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों के तहत लगभग 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। अब पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत ₹70,125 करोड़ के बजट के साथ, 25,000 पात्र बिना संपर्क सुविधा वाले गांवों और बस्तियों को जोड़ने के लिए लगभग 62,500 किलोमीटर हर मौसम में चलने योग्य सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
भारत के ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र बस्ती तक संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने के लिए नई प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र सत्यापन, निगरानी और त्वरित निर्णय लेने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी, जीपीएस-आधारित निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर बल दिया। उन्होंने निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और निविदा प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही को मजबूत करने की आवश्यकता जताई।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने पूर्वोत्तर और कठिन इलाकों में लंबित कार्यों की बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पांच वर्ष की रखरखाव अवधि के दौरान ठेकेदारों की जिम्मेदारी बढ़ाने और हरित प्रौद्योगिकी अपनाने का आग्रह किया। ग्रामीण विकास सचिव श्री रोहित कंसल ने वर्तमान व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए नई योजनाओं और डिजिटल टूल्स को तेजी से अपनाने पर जोर दिया।
इस शिविर में सीआरआरआई, एनडीएमए और सीडीआरआई के विशेषज्ञों ने आपदा-प्रतिरोधी और जलवायु-अनुकूल सड़कों, टिकाऊ सामग्री और एआई-आधारित डिजिटल निगरानी प्रणालियों पर चर्चा की। साथ ही, सीमा सड़क संगठन (BRO) के विशेषज्ञों ने चुनौतीपूर्ण और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सड़क निर्माण के अपने अनुभवों और तकनीकी समाधानों को साझा किया।
शिविर के मुख्य निष्कर्षों में जलवायु-अनुकूल डिज़ाइन को बढ़ावा देना, ओएमएमएएस, जीपीएस-वीटीएस और डेटा एनालिटिक्स के जरिए पारदर्शी निगरानी करना, और ग्रामीण विकास मंत्रालय, एनआरआईडीए एवं राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करना शामिल है। सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण और तकनीक-सक्षम बुनियादी ढांचा तैयार करना है, ताकि ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक लाभ मिल सकें।



