भारत 2047 तक रणनीतिक संप्रभुता के लिए नवाचारों के व्यावसायीकरण पर जोर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से मांगा सहयोग
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक उद्यमों में बदलने और 2047 तक भारत की तकनीकी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से नवाचार की गति बढ़ाने और वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक उद्यमों में बदलने का आग्रह किया है। नई दिल्ली में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के 121वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के राष्ट्रीय उद्देश्यों को प्राप्त करने और देश की रणनीतिक संप्रभुता को मजबूत करने के लिए भारत की तकनीकी क्षमताओं का विस्तार करना आवश्यक है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक क्षमताओं को स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधानों में बदलने के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत तालमेल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अब केवल अन्य देशों की प्रौद्योगिकियों को अपनाने के बजाय वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक स्वदेशी समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में पेश किया।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की प्रगति पर चर्चा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार के लिए आठ वर्षों में 2,000 किलोमीटर का लक्ष्य रखा था, जिसमें से तीन वर्षों में ही 1,000 किलोमीटर का पड़ाव हासिल कर लिया गया है। उन्होंने क्वांटम संचार के रणनीतिक महत्व और घरेलू क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
जैव-अर्थव्यवस्था (Bio-economy) के क्षेत्र में भारत की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में इसका आकार लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो अब बढ़कर करीब 196 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसे 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्टार्टअप्स के विस्तार को जीवन विज्ञान और उन्नत अनुसंधान के क्षेत्र में उभरते अवसरों का प्रमाण बताया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि अनुसंधान परियोजनाओं की शुरुआत से ही उद्योग जगत की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वैज्ञानिकों को बाजार की जरूरतों और तकनीकी आवश्यकताओं की स्पष्ट समझ मिल सके। उन्होंने पीएचडीसीसीआई जैसे संगठनों से अनुसंधानकर्ताओं और व्यवसायों के बीच सेतु बनने तथा निवेश को सुगम बनाने का आह्वान किया।
अंत में, मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा की विश्वसनीय आपूर्ति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रणनीतिक और उभरती प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमताओं का विकास भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अनिवार्य है।



