भारत का बढ़ता सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र: राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत भारत ने स्वदेशी तकनीक के माध्यम से अपनी कंप्यूटिंग क्षमताओं का विस्तार किया है, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और सामाजिक अनुप्रयोगों को मजबूती मिली है।

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा 1990 के दशक की शुरुआत में 'परम 8000' के साथ शुरू हुई थी, जो अब 2015 में शुरू किए गए राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के माध्यम से एक व्यापक राष्ट्रीय परितंत्र में बदल गई है। सितंबर 2026 तक, भारत ने 68 पेटाफ्लॉप्स (PF) की संयुक्त क्षमता वाले 40 सुपर कंप्यूटर तैनात किए हैं। इसमें 1 PF से अधिक की 13 हाई-एंड प्रणालियां, 500 TF से 1 PF के बीच की 12 मिड-रेंज प्रणालियां और 15 अन्य प्रणालियां शामिल हैं।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को अप्रैल 2015 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लॉन्च किया गया था। इसका संचालन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इस मिशन को आगे बढ़ाने में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु की महत्वपूर्ण भूमिका है। मिशन का मुख्य उद्देश्य सुपरकंप्यूटिंग में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) क्षमताओं को मजबूत करना है।
एनएसएम के तहत कई स्वदेशी घटकों का विकास किया गया है, जिसमें सी-डैक द्वारा विकसित 'रुद्र' सर्वर श्रृंखला प्रमुख है। सितंबर 2026 तक, परम रुद्र सुपर कंप्यूटरों में 6,000 रुद्र सर्वर तैनात किए जा चुके हैं और 1,500 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, 100 Gbps और 200 Gbps की गति वाले हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट नेटवर्क, स्वदेशी शीतलन (कूलिंग) तकनीक और एक पूर्ण HPC सिस्टम सॉफ्टवेयर स्टैक विकसित किया गया है। छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए 'परम शावक' नामक सुपरकंप्यूटिंग-इन-द-बॉक्स भी निर्मित किया गया है।
सुपरकंप्यूटिंग का उपयोग विभिन्न राष्ट्रीय और सामाजिक अनुप्रयोगों में किया जा रहा है। इसमें जीनोमिक्स और ड्रग डिस्कवरी प्लेटफॉर्म, शहरी पर्यावरण निर्णय सहायता प्रणाली, तेल और गैस खोज के लिए भूकंपीय इमेजिंग सूट, और महानदी नदी बेसिन के लिए बाढ़ की भविष्यवाणी प्रणाली शामिल हैं। साथ ही, सिक्किम हिमालय जैसे क्षेत्रों में जंगल की आग के प्रसार का मॉडल तैयार करने और सामग्री विज्ञान के सिमुलेशन में भी इसका उपयोग हो रहा है।
मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में, एनएसएम ने 400 से अधिक संस्थानों के 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं और 2,900 से अधिक पीएचडी छात्रों की सहायता की है। सितंबर 2026 तक इन प्रणालियों ने 1.5 करोड़ से अधिक कंप्यूट जॉब्स निष्पादित किए हैं और 1,990 से अधिक शोध प्रकाशनों में योगदान दिया है। राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (NKN) इस पूरे परितंत्र की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहा है, जो विभिन्न संस्थानों को उच्च गति नेटवर्क के माध्यम से जोड़ता है।
भविष्य की दिशा में, भारत का लक्ष्य और अधिक ऊर्जा-कुशल और विश्वसनीय प्रणालियों का निर्माण करना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और HPC के एकीकरण से स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसी चुनौतियों का समाधान करने और 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को समर्थन देने की योजना है।


