भारत ने समय से पहले पूरे किए COP-21 के जलवायु लक्ष्य, सोलर एनर्जी क्षमता 2 से 160 गीगावाट पहुंची: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की पर्यावरण सुरक्षा उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि देश का विकास तीव्र और टिकाऊ है।

प्रधानमंत्री ने "पर्यावरण और जलवायु गतिकी का भविष्य" विषय पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधित करते हुए भारत की पर्यावरण और जलवायु संरक्षण की दिशा में की गई प्रगति का विवरण साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पदाधिकारियों को बधाई दी और कहा कि भारत अपने सांस्कृतिक अनुभवों और आधुनिक विजन के माध्यम से जलवायु चुनौतियों का समाधान दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कार्बन उत्सर्जन के मुद्दे पर स्पष्ट किया कि प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत के आधे से भी कम है, जबकि विकसित देशों में यह भारत की तुलना में छह गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि भारत G20 का एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस में COP-21 समिट के दौरान किए गए अपने सभी कमिटमेंट्स को समय से पहले पूरा कर लिया है।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की सोलर एनर्जी क्षमता 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुक्त बिजली योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत 50 लाख से अधिक घरों में रूफ टॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं और सरकार ने प्रति घर लगभग 80,000 रुपये की मदद दी है। इसके अलावा, कुसुम योजना के माध्यम से 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, अकेले सोलर एनर्जी से भारत ने करीब 20 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन रोकने में सफलता पाई है।
क्लीन मोबिलिटी पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पहली और दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले देश में ईवी (EV) की बिक्री 3,000 से कम थी, जो पिछले साल बढ़कर करीब 25 लाख हो गई है। साथ ही, देश के मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 250 किलोमीटर से बढ़कर अब 1,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है, जो 20 से ज्यादा शहरों में संचालित है। रेलवे के लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन और 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लोकार्पण से भी पर्यावरण संरक्षण में मदद मिली है।
जल संरक्षण और कृषि के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने 70,000 से अधिक अमृत सरोवरों के निर्माण और 'कैच द रेन' अभियान के तहत 1.5 करोड़ वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 'श्री अन्न' (मिलेट्स) के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने से पानी की बचत हो रही है, जिसके कारण 2023 को 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के रूप में मनाया गया। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 12.5 लाख हेक्टेयर में 24,000 क्लस्टर्स बनाए गए हैं और 3,000 किस्म की क्लाइमेट रेजिलियंट फसलें विकसित की गई हैं।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का 'वेरी डेंस फॉरेस्ट कवर' 22% से अधिक बढ़ा है और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं। प्लास्टिक कचरे की चुनौती से निपटने के लिए सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक लगाई गई है और गोबरधन योजना के माध्यम से 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल को अपनाया जा रहा है।
