भारतीय नौसेना पोत आईएनएस त्रिशूल ने फ्रांस में समुद्री अभ्यास 'वरुण' के 24वें संस्करण में लिया हिस्सा
आईएनएस त्रिशूल ने फ्रांस के टूलॉन में फ्रांसीसी नौसेना के साथ वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 'वरुण' के 24वें संस्करण में भाग लिया, जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री संबंधों को मजबूती मिली है।
भारतीय नौसेना पोत आईएनएस त्रिशूल, फ्रांसीसी नौसेना के साथ वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 'वरुण' के 24वें संस्करण में शामिल होने के लिए 22 सितंबर 2026 को फ्रांस के टूलॉन पहुंचा। इस अवसर पर फ्रांसीसी नौसेना ने औपचारिक वॉटर कैनन सैल्यूट के माध्यम से आईएनएस त्रिशूल का स्वागत किया।
अभ्यास के हार्बर चरण के दौरान पेशेवर, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री और पेशेवर संबंधों को प्रगाढ़ करना था। आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर ने संचालन के उप कमांडर-इन-चीफ (सीईसीएमईडी) रियर एडमिरल मैकारा ओउक और फ्रांसीसी नौसेना के अन्य वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत की। इसके अतिरिक्त, कमांडिंग ऑफिसर और क्रू ने मार्सिले के मजार्ग्स युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर विश्व युद्धों के दौरान शहीद हुए 205 भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
पेशेवर गतिविधियों के तहत क्रॉस-डेक दौरों और परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया ताकि अंतर-संचालनीयता (inter-operability) को बढ़ावा मिले। आईएनएस त्रिशूल पर आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में टूलॉन के उप महापौर, वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) लॉरेंट इस्नार्ड और फ्रांसीसी नौसेना के अधिकारियों सहित कई नागरिक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। साथ ही, कर्मियों के बीच सौहार्द बढ़ाने के लिए एक वॉलीबॉल मैच भी खेला गया।
आईएनएस त्रिशूल के चालक दल ने फ्रांसीसी नौसेना के जहाजों चार्ल्स डी गॉल, फोर्बिन और ला फेयेट का दौरा किया, जिससे उन्हें विमानवाहक पोत संचालन और जहाज की प्रक्रियाओं की जानकारी मिली। समुद्री अभ्यास के दौरान आईएनएस त्रिशूल ने फ्रांसीसी नौसेना की इकाइयों एफडीए फोर्बिन, एफएलएफ ला फेयेट और एसएनए सफ्रेन के साथ-साथ एनएच90 हेलीकॉप्टर और अटलांटिक-2 समुद्री गश्ती विमान के साथ तालमेल बैठाया।
इस अभ्यास में पनडुब्बी रोधी, सतह रोधी, लाइव फायरिंग और क्रॉस-डेक हेलीकॉप्टर लैंडिंग जैसे महत्वपूर्ण अभ्यास शामिल थे, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय और तालमेल में वृद्धि हुई। आईएनएस त्रिशूल की यह यात्रा भारत और फ्रांस के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी और पेशेवर आदान-प्रदान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

