रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग शुरू करेगा 'विशेष अभियान 6.0', ई-कचरा निपटान और कार्यस्थल दक्षता पर होगा जोर
रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान 6.0 संचालित करेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य ई-कचरे का प्रभावी प्रबंधन और कार्यालय दक्षता में सुधार करना है।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग (DCPC) ने 'विशेष अभियान 6.0' की तैयारी शुरू कर दी है। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस वर्ष के अभियान का मुख्य विषय 'ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान' रखा गया है।
अभियान के तहत ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 और अन्य लागू दिशानिर्देशों के अनुसार ई-कचरे की पहचान और निपटान पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, विभाग कार्यालय स्थान के अनुकूलन, अनावश्यक वस्तुओं और स्क्रैप के निपटान, रिकॉर्ड प्रबंधन और समग्र कार्यस्थल वातावरण को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस अभियान के प्रारंभिक चरण में 15 से 30 सितंबर की अवधि के दौरान कई स्वच्छता गतिविधियां आयोजित की गईं।
विशेष अभियान 6.0 के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में सतत स्वच्छता के लिए स्थानों की पहचान, कार्यालय सौंदर्यीकरण, सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) के अनुसार स्क्रैप निपटान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण शामिल है। विभाग संसद सदस्यों, प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्य सरकारों और अंतर-मंत्रालयी कैबिनेट से प्राप्त लंबित संदर्भों की समीक्षा करेगा। साथ ही, तीन महीने से अधिक समय से लंबित संसदीय आश्वासनों की निगरानी और CPGRAMS सहित अन्य स्रोतों से प्राप्त सार्वजनिक शिकायतों का समयबद्ध निपटान किया जाएगा। रिकॉर्ड प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए भौतिक फाइलों की छंटाई और ई-फाइलों को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि विभाग ने 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक 'विशेष अभियान 5.0' का सफल संचालन किया था। उस दौरान कबाड़ निपटान से 9.18 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ और 7,156 वर्ग फुट कार्यालय क्षेत्र खाली कराया गया। अभिलेख प्रबंधन के तहत 4,792 भौतिक फाइलों और 1,275 ई-फाइलों की समीक्षा की गई, जिनमें से क्रमशः 237 भौतिक और 170 ई-फाइलों को बंद किया गया। इस दौरान प्राप्त छह सार्वजनिक शिकायतों का पूर्ण निपटान किया गया और नौ संसदीय आश्वासनों की निगरानी की गई।
इस पहल में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), कीटनाशक सूत्रीकरण प्रौद्योगिकी संस्थान (IPFT), हिंदुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड (HOCL) और HIL जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त संस्थानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है। अब तक कुल 93 स्वच्छता गतिविधियां चलाई जा चुकी हैं। विभाग का लक्ष्य संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देकर नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवाओं के वितरण को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।


