विधि कार्य विभाग ने 'स्वच्छता ही सेवा 2026' के तहत ई-कचरा प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन किया
नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के उत्तरदायी प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल तौर-तरीकों के प्रति जागरूक करना था।

विधि कार्य विभाग ने 'विशेष अभियान 6' और 'स्वच्छता ही सेवा 2026' के अंतर्गत 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 'ई-कचरा प्रबंधन' पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के उत्तरदायी प्रबंधन के महत्व से अवगत कराना और उनके दैनिक जीवन व कार्यस्थल पर पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सचिव डॉ. राजीव मणि ने ई-वेस्ट मैनेजमेंट की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सही रखरखाव और निपटान के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाना जरूरी है ताकि पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सके। उन्होंने इस दिशा में स्थायी तौर-तरीके अपनाने और सामूहिक जिम्मेदारी लेने की बात कही।
इस सत्र के दौरान प्रतिभागियों को ई-वेस्ट मैनेजमेंट के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सामान को सही ढंग से अलग करना, उन्हें सुरक्षित रूप से इकट्ठा करना और जिम्मेदारी पूर्वक डिस्पोज एवं रि-साइकल करना शामिल था। कार्यशाला में '3आर' (3R) दृष्टिकोण—रिड्यूस (कम करें), रियूज (पुनः उपयोग करें) और रि-साइकल (पुनर्चक्रण करें)—के बारे में बताया गया, ताकि ई-कचरे के उत्पादन को कम किया जा सके और उचित चैनलों के माध्यम से उनका पुनर्चक्रण सुनिश्चित हो।
इस पहल के माध्यम से बेकार हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उनके पुर्जों के जिम्मेदार निपटान के साथ-साथ स्थायी खपत के फायदों पर भी चर्चा की गई। यह आयोजन स्वच्छता, स्थिरता और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए विभाग के प्रयासों का हिस्सा है। विधि कार्य विभाग ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह जागरूकता और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से एक साफ-सुथरे और व्यवस्थित कार्यस्थल को बढ़ावा देता रहेगा।


