सामाजिक न्याय मंत्रालय की आर्थिक समावेशन पहल: वंचित समुदायों के लिए उद्यमिता और पुनर्वास को मिला बढ़ावा
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के उद्यम पूंजी कोष के माध्यम से करोड़ों रुपये की सहायता प्रदान कर हजारों रोजगार सृजित किए हैं।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने आर्थिक समावेशन प्रभाग के माध्यम से वंचित समुदायों के लिए उद्यमिता, आजीविका सृजन और पुनर्वास सहायता प्रदान कर रहा है। इस पहल के अंतर्गत अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC), पिछड़े वर्गों के लिए उद्यम पूंजी कोष और 'स्माइल' (SMILE) योजना के तहत भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
आर्थिक समावेशन प्रभाग की उप महानिदेशक सुश्री प्रतिमा गुप्ता ने जानकारी दी कि अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष की कुल राशि 750 करोड़ रुपये है। यह कोष 4 प्रतिशत की ब्याज दर पर 10 लाख रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है। मई 2026 तक, इस कोष से 145 कंपनियों के लिए 613.02 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है, जिसमें से 123 कंपनियों को 437.74 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
इसी क्रम में, मंत्रालय ने 30 सितंबर, 2020 को 'अंबेडकर सोशल इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन मिशन' शुरू किया। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के युवा शोधकर्ताओं और छात्रों के नवोन्मेषी विचारों को 30 लाख रुपये तक की सहायता देना है। इस मिशन के तहत अब तक 114 कंपनियों को 29.11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और 91 कंपनियों को 13.27 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।
पिछड़े वर्गों के लिए उद्यम पूंजी कोष की शुरुआत अक्टूबर 2019 में की गई थी। 200 करोड़ रुपये के साथ संचालित यह कोष 6 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 लाख रुपये से 15 करोड़ रुपये तक की सहायता देता है। इसके तहत 31 कंपनियों के लिए 142.88 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 19 कंपनियों को 70.23 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
सुश्री प्रतिमा गुप्ता के अनुसार, इन दोनों कोषों के माध्यम से अनुसूचित जाति के 329 और पिछड़े वर्गों के 35 उद्यमियों को सहायता मिली है, जिससे लगभग 4,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। इन निवेशों से करीब 800 करोड़ रुपये की स्थायी उत्पादक परिसंपत्तियां निर्मित हुई हैं।
पुनर्वास के मोर्चे पर, 'स्माइल' योजना के तहत भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों की पहचान, बचाव, आश्रय, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कौशल विकास पर कार्य किया जा रहा है। 23 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुई इस पहल के लिए वित्त वर्ष 2025-26 तक केंद्र सरकार द्वारा 46.16 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसमें से 27.17 करोड़ रुपये अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में जारी हुए हैं।


