सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली के मानकीकरण के लिए कार्य समूह की पहली बैठक संपन्न
भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी औषध संहिता आयोग ने सोवा-रिग्पा औषधियों के विकास और गुणवत्ता मानकों के निर्धारण के लिए पहली बैठक आयोजित की है।

भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी औषध संहिता आयोग (PCIM&H) के अंतर्गत गठित सोवा-रिग्पा कार्य समूह की पहली बैठक 18 सितंबर को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित पीसीआईएम एंड एच में आयोजित की गई। यह बैठक भारत में सोवा-रिग्पा औषध संहिताओं और प्रपत्रों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस बैठक की अध्यक्षता पीसीआईएम एंड एच के निदेशक डॉ. कौस्तुभा उपाध्याय ने की। बैठक में विभिन्न सोवा-रिग्पा संस्थानों के चार विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें लेह स्थित राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान की निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट भी शामिल थीं। डॉ. पद्मा गुरमेट ने सोवा-रिग्पा औषध संहिताओं और प्रपत्रों पर कार्य शुरू करने के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।
कार्य समूह का मुख्य उद्देश्य सोवा-रिग्पा दवाओं के नियामक प्रावधानों के कार्यान्वयन और गुणवत्ता आश्वासन को सुनिश्चित करना है। इसके लिए आवश्यक फॉर्मूलरी, फार्माकोपिया और अन्य वैधानिक एवं गैर-वैधानिक दस्तावेजों के विकास हेतु एक चरणबद्ध कार्य योजना तैयार की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया पीसीआईएम एंड एच के दायरे में तथा औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत बने नियमों के अनुसार संपन्न की जाएगी।
इस पहल के माध्यम से भारत सरकार के पारंपरिक चिकित्सा संबंधी नियामक ढांचे के अंतर्गत सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणाली का विकास और मानकीकरण करना है। औषध संहिता और प्रपत्रों के विकास से सोवा-रिग्पा औषधियों के लिए गुणवत्ता मानकों और नियामक आवश्यकताओं का एक संरचित आधार तैयार होगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी के लिए औषध संहिता आयोग, आयुष मंत्रालय के अधीन एक अधीनस्थ कार्यालय है। यह आयोग औषध संहिताओं और प्रपत्रों के विकास के लिए उत्तरदायी है और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों एवं होम्योपैथी के लिए केंद्रीय औषधि परीक्षण-सह-अपीलीय प्रयोगशाला के रूप में भी कार्य करता है।


