उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अमृतापुरी में 'विश्व सेवा दिनम' समारोह में शिरकत की, विभिन्न मानवीय पहलों का किया शुभारंभ
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने माता अमृतानंदमयी देवी के 73वें जन्मोत्सव के अवसर पर कोल्लम के अमृतापुरी में आयोजित विश्व सेवा दिनम समारोह में भाग लिया।

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने केरल के कोल्लम स्थित अमृतापुरी में माता अमृतानंदमयी देवी के 73वें जन्मोत्सव के अवसर पर माता अमृतानंदमयी मठ द्वारा आयोजित 'विश्व सेवा दिनम' समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने माता अमृतानंदमयी देवी के प्रति सम्मान व्यक्त किया और मानवता की सेवा के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने मठ की कई महत्वपूर्ण मानवीय पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने भारत में नेपाल के राजदूत श्री सुरेंदर थापा को नेपाल बाढ़ राहत के लिए 2 करोड़ रुपये की सहायता राशि सौंपी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कोच्चि और फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पतालों में वंचित लाभार्थियों के लिए मुफ्त सर्जरी के प्रमाण पत्र और मछुआरों के परिवारों को वित्तीय सहायता वितरित की। उपराष्ट्रपति ने भारत और श्रीलंका में 50,000 मकानों के निर्माण के उपलक्ष्य में 'अमृताकुटीरम 30वीं वर्षगांठ स्मारिका' और आश्रम के तीन नए प्रकाशनों—'द हनुमान चालीसा', 'द ओशन ऑफ ग्रेस' एवं 'सत्यम शिवम सुंदरम' का विमोचन भी किया।
सभा को संबोधित करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि माता अमृतानंदमयी देवी का जीवन प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का संदेश है। उन्होंने बताया कि 1998 से भारत में 890 करोड़ रुपये से अधिक की धर्मार्थ चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है, जिससे 64 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। उपराष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण के लिए 'अमृताश्री' (AmritaSREE) पहल का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से 15,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की लगभग 2.5 लाख महिलाओं को पूंजी और प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
उपराष्ट्रपति ने मठ द्वारा दुनिया भर में 55,000 से अधिक छात्रवृत्तियों, बेघर लोगों के लिए 50,000 से अधिक घरों के निर्माण और एक लाख से अधिक जरूरतमंदों के लिए पेंशन योजनाओं की सराहना की। उन्होंने आपदाओं, जैसे हिंद महासागर सुनामी, गुजरात भूकंप, उत्तराखंड और केरल बाढ़, कोविड-19 महामारी तथा वायनाड भूस्खलन के दौरान संगठन द्वारा किए गए राहत कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने 'नमामि गंगे' कार्यक्रम में मठ के 100 करोड़ रुपये के योगदान और 'अमल भारतम' एवं 'बिलियन ट्री कैंपेन' जैसी पर्यावरण पहलों को भी रेखांकित किया।
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि मानवता को केवल तकनीकी प्रगति ही नहीं, बल्कि करुणापूर्ण प्रगति की आवश्यकता है। उन्होंने 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए कहा कि विकास का एक मानवीय पहलू होना अनिवार्य है और 'विकास भी, विरासत भी' का सिद्धांत इस यात्रा का मार्गदर्शक होना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि विकसित भारत एक समावेशी भारत हो, जहाँ कोई भी पीछे न छूटे।
इस कार्यक्रम में केरल एवं तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, केरल के मुख्यमंत्री श्री वी. डी. सतीसन, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी, केरल विधानसभा के अध्यक्ष श्री तिरुवंचूर राधाकृष्णन, न्यायमूर्ति गोपीनाथ, सांसद श्री एन. के. प्रेमचंद्रन, श्री शशि थरूर और नेपाल के राजदूत श्री सुरेंद्र थापा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
