केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर में WWF वैश्विक संरक्षण सम्मेलन का किया उद्घाटन, वन्यजीव संरक्षण के लिए वैश्विक कार्रवाई का आह्वान
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर में विश्व प्रकृति कोष (WWF) वैश्विक संरक्षण सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सह-अस्तित्व पर जोर दिया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर में विश्व प्रकृति कोष (WWF) वैश्विक संरक्षण सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए संरक्षण और सह-अस्तित्व के लिए वैश्विक स्तर पर कार्य करने और एक समुदाय के रूप में एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अपर महानिदेशक (वन्यजीव) श्री रमेश पांडे, राजस्थान सरकार के वन बल प्रमुख और प्रधान वन संरक्षक श्री अरिजीत बनर्जी, WWF-अंतर्राष्ट्रीय के मुख्य संरक्षण अधिकारी श्री दाउदी सांबा और WWF-भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रवि सिंह उपस्थित थे।
श्री भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को साझा करते हुए पिछले दशक की उपलब्धियों का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या लगभग 750 से बढ़कर 1000 से अधिक हो गई है। साथ ही, बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 47 से बढ़कर 58, हाथी अभ्यारण्यों की संख्या 30 से बढ़कर 33 और रामसर स्थलों की संख्या 24 से बढ़कर 101 हो गई है। उन्होंने भारत में चीतों की सफल वापसी का भी उल्लेख किया।
मंत्री ने कहा कि प्रजातियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता संवैधानिक और सांस्कृतिक दोनों है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में वन्यजीवों की रक्षा को राज्य का निर्देश और नागरिक का कर्तव्य बनाया गया है। भारत CITES, CMS, CBD और रामसर कन्वेंशन का भी पक्षकार है, और बाघों, हाथियों, गैंडों तथा एशियाई शेरों की बहाली निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है।
श्री यादव ने वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी तंत्र की भूमिका पर जोर देते हुए बताया कि बाघ, हाथी, डॉल्फिन, शेर और हिम तेंदुए जैसे जीवों के अखिल भारतीय जनसंख्या अनुमानों से पर्यावास सुधार और गलियारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि मिली है। उन्होंने राजस्थान में ग्रेट इंडिया बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण प्रजनन की सफलता और ओरान पवित्र उपवनों के माध्यम से सामुदायिक नेतृत्व में किए गए प्रयासों की सराहना की, जिससे भूमि क्षरण रोकने में मदद मिली है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने वन, आर्द्रभूमि और घास के मैदानों के संरक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने एक सींग वाले गैंडे और जंगली जल भैंस के संरक्षण के लिए चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी और वन्यजीव संरक्षणवादियों से कारगर उपायों को अमल में लाने का आह्वान किया।



