पर्यटन और आधुनिक तकनीक से बदल रहा है भारत के लाइटहाउस का स्वरूप, अब बन रहे हैं प्रमुख लैंडमार्क
भारत अपने ऐतिहासिक लाइटहाउस को नेविगेशन के साथ-साथ पर्यटन केंद्रों और संग्रहालयों के रूप में विकसित कर रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

भारत अपनी 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और 205 लाइटहाउस के माध्यम से अपनी समुद्री विरासत को एक नए नजरिए से प्रस्तुत कर रहा है। अब ये लाइटहाउस केवल जहाजों को रास्ता दिखाने वाले बीकन नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। इस पहल के परिणामस्वरूप लाइटहाउस पर्यटन में आने वाले पर्यटकों की संख्या 2014 के लगभग 4 लाख से बढ़कर 2024-25 में 18.63 लाख हो गई है।
देशभर में 75 लाइटहाउस को उनके ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प महत्व के कारण पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया गया है। इनमें गुजरात के मांडवी और द्वारका, कर्नाटक का तादरी, तमिलनाडु का पंबन और केरल का विझिनजम लाइटहाउस शामिल हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ लाइटहाउस एंड लाइटशिप्स (DGLL) ने एक डिजिटल टिकटिंग पोर्टल भी शुरू किया है। इस बदलाव से स्थानीय होटलों, रेस्तरां, ट्रांसपोर्ट सेवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
तकनीकी रूप से, भारत के सभी लाइटहाउस अब सौर ऊर्जा चालित हैं। गुजरात के सामियानी द्वीप और जोड़िया जैसे स्टेशनों पर तेल के दीयों की जगह आधुनिक एलईडी लालटेन और इलेक्ट्रॉनिक फ्लैशर लगाए गए हैं। सुरक्षा बढ़ाने के लिए 87 ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) शोर स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जो सोलास (SOLAS) के नियमों के अनुसार डेटा ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए जहाजों के सुरक्षित नेविगेशन में मदद करते हैं।
समुद्री इतिहास को संजोने के लिए चेन्नई, महाबलीपुरम, अलाप्पुझा, कन्नूर, मुट्टोम, द्वारका और गोपनाथ में लाइटहाउस संग्रहालय बनाए गए हैं। महाबलीपुरम का लाइटहाउस, जो पल्लव राजाओं के समय के समुद्री व्यापार से जुड़ा है, अब एक जीवंत विरासत और आधुनिक एलईडी तकनीक का संगम है। इसके अलावा, गुजरात के लोथल में ₹266.11 करोड़ की अनुमानित लागत से नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NMHC) बनाया जा रहा है, जिसमें दुनिया के सबसे ऊंचे लाइटहाउस संग्रहालयों में से एक (77 मीटर ऊंचा) शामिल होगा। विशाखापत्तनम में भी एक नए लाइटहाउस संग्रहालय की योजना है जिसके लिए 3,156 वर्ग मीटर जमीन तय की गई है।
समुद्री विरासत को बढ़ावा देने के लिए 'भारतीय लाइटहाउस महोत्सव' का आयोजन भी शुरू किया गया है। इसका पहला संस्करण 2023 में गोवा के फोर्ट अगुआडा, दूसरा 2024 में पुरी और तीसरा 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित हुआ। इन आयोजनों ने सैंड आर्ट, लोक नृत्य, संगीत और तटीय खान-पान के जरिए समुदायों को जोड़ा है।
भविष्य की योजनाओं के तहत 25 और लाइटहाउस को पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पांडु, बोगीबील, सिलघाट और विश्वनाथ घाट पर लगभग ₹84 करोड़ की लागत से चार नए लाइटहाउस बनाए जा रहे हैं। ये अंदरूनी जलमार्ग पर भारत का पहला लाइटहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। इन स्थलों पर नेविगेशन के साथ-साथ संग्रहालय, एम्फीथिएटर और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।



