प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, दृढ़ संकल्प और अटूट लगन के महत्व पर दिया जोर
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से बताया कि दृढ़ निश्चयी व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक हार नहीं मानता।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। इस सुभाषितम् के जरिए उन्होंने जीवन में दृढ़ संकल्प और अटल लगन के महत्व को रेखांकित किया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि जो व्यक्ति दृढ़ निश्चयी और अटल होते हैं, वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक कभी हार नहीं मानते।
प्रधानमंत्री ने समुद्र मंथन का उदाहरण देते हुए इस बात पर जोर दिया कि जिस प्रकार देवता समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए बहुमूल्य रत्नों और घातक विष से विचलित नहीं हुए, उन्होंने अमरत्व का अमृत प्राप्त होने तक अपना प्रयास जारी रखा।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषितम् इस प्रकार है: “रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्। सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीराः॥”
इस सुभाषितम का अर्थ स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि जिस प्रकार देवता समुद्र में मिले रत्नों और घातक विष से विचलित हुए बिना अमृत की प्राप्ति तक निरंतर प्रयास करते रहे, ठीक उसी प्रकार दृढ़ निश्चयी और अविचल आत्माएं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने तक विश्राम नहीं करती हैं।

