स्वच्छता उद्यमी योजना से बदली जिंदगी: कचरा बीनने वाली मेकाला येसम्मा बनीं आत्मनिर्भर
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से मेकाला येसम्मा ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर मासिक आय को 8,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर लिया है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की पहल से वंचित समुदायों के लोगों को टिकाऊ आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण मिल रहा है। इसका एक जीवंत उदाहरण 33 वर्षीय सुश्री मेकाला येसम्मा की यात्रा है, जो अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से संबंध रखती हैं।
गुंटूर नगर निगम में पिछले 12 वर्षों से कचरा बीनने का काम कर रही सुश्री मेकाला आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित रही थीं। कम आय और सीमित अवसरों के कारण उन्हें अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
परिवर्तन की शुरुआत 19 जून 2023 को हुई, जब सुश्री येसम्मा को नवजीवन संगठन के माध्यम से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम की 'स्वच्छता उद्यमी योजना' (एसयूवाई) के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता का उपयोग एक समूह परियोजना के तहत ट्रैक्टर-माउंटेड 'ओपन नाला क्लीनर' खरीदने के लिए किया गया। इस पूरी परियोजना की कुल लागत 16,99,952 रुपये थी, जिसमें 10,24,964 रुपये का ऋण और 6,74,988 रुपये की पूंजी सब्सिडी शामिल थी।
इस योजना के प्रभाव से उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। सहायता मिलने से पहले सुश्री येसम्मा की मासिक आय लगभग 8,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 18,000 रुपये हो गई है। हर महीने होने वाली इस 10,000 रुपये की अतिरिक्त आय ने उन्हें बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्चों और परिवार के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम बनाया है।
अपनी सफलता पर आभार व्यक्त करते हुए सुश्री मेकाला येसम्मा ने कहा, "एसयूवाई योजना के अंतर्गत मिली आर्थिक सहायता से मुझे अपनी आजीविका बेहतर करने और अपनी मासिक आय बढ़ाने में मदद मिली है। इससे मेरे लिए परिवार की ज़रूरतें पूरी करना, बच्चों की पढ़ाई में मदद करना और एक सुरक्षित भविष्य की दिशा में काम करना आसान हो गया है।"
यह मामला दर्शाता है कि कैसे समय पर मिली वित्तीय सहायता और आजीविका के अवसर वंचित वर्गों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिला सकते हैं।



