आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को किया विस्तार
आयुष मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में AI तकनीक को बढ़ावा दे रहा है, जिसके तहत कई विशेष चैटबॉट्स और डिजिटल पहल शुरू की गई हैं।

आयुष मंत्रालय ने आयुष ग्रिड के डिजिटल आधार को आगे बढ़ाते हुए आयुर्वेद और व्यापक आयुष क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अगली प्रमुख तकनीक के रूप में अपनाने का निर्णय लिया है। मंत्रालय वर्तमान में स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा, सूचना सेवाओं और निवेश सुविधा के क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है।
इस पहल के तहत कई विशिष्ट एआई-आधारित चैटबॉट्स विकसित किए गए हैं। एमएआईएसपी चैटबॉट के माध्यम से आम लोग आयुर्वेद और आयुष से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के लिए 'एआरपी रिसर्च असिस्टेंट' तैयार किया गया है, जो जनरेटिव एआई की मदद से आयुष विषयों से संबंधित साहित्य को खोजने और समझने में सहायक है। इसके अलावा, शिक्षण संस्थानों के लिए 'ई-एलएमएस चैटबॉट' विद्यार्थी जीवन चक्र प्रबंधन की सुविधा देता है, जबकि 'ई-चरक चैटबॉट' औषधीय पौधों के व्यापार और आयुर्वेदिक औषध विज्ञान के तंत्र से जुड़ा है। योग संबंधी सुझावों के लिए 'योग सारथी' और निवेश सहायता के लिए 'निवेश सारथी' चैटबॉट्स विकसित किए गए हैं।
इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ साझेदारी में तैयार स्वास्थ्य एआई केसबुक में आयुष मंत्रालय के एक विशेष उदाहरण को शामिल किया गया, जिसका शीर्षक “आयुर्वेद के लिए एआई आधारित निर्णय सहायता : रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन दृष्टिकोण” था। यह कदम जनरेटिव एआई और आरएजी तकनीक के माध्यम से प्रमाण-आधारित आयुर्वेदिक ज्ञान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मंत्रालय 'इंडियाएआई इनोवेशन चैलेंज' के माध्यम से आवाज आधारित इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड, रोगों के रुझान की पहचान और व्यक्तिगत उपचार सहायता जैसे समाधान विकसित कर रहा है। इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 'डिजिटल इंडिया भाषिणी' प्रभाग के सहयोग से आयुष ग्रिड के पोर्टल अब भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे चिकित्सकों और विद्यार्थियों की पहुंच बढ़ेगी।
गौरतलब है कि 11 जुलाई 2025 को विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन ने संयुक्त रूप से पारंपरिक चिकित्सा में एआई के उपयोग पर एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जिम्मेदार और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया गया था। आयुष मंत्रालय का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को तकनीक से बदलना नहीं, बल्कि एआई के माध्यम से इसे अधिक सुलभ, खोज योग्य और प्रमाण-आधारित बनाना है।



