कूड़ा बीनने वाली महिला बनीं उद्यमी, स्वच्छता उद्यमी योजना से बदला जीवन
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से एक अनुसूचित जनजाति की महिला ने कूड़ा बीनने के काम से निकलकर एक सफल उद्यमी के रूप में नई पहचान बनाई है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से वंचित समुदायों को आर्थिक सहायता और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। इसी दिशा में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय की 30 वर्षीय सुश्री मेकाला नंचारम्मा की कहानी प्रेरणादायक साबित हुई है, जिन्होंने कूड़ा बीनने के कठिन काम से निकलकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है।
सुश्री नंचारम्मा पिछले 12 वर्षों से गुंटूर नगर निगम में कूड़ा बीनने का कार्य कर रही थीं। आर्थिक तंगी के कारण वे स्कूल नहीं जा सकीं और निरक्षर रहीं। अनियमित आय और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें और उनके परिवार को गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित थीं।
उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें नवजीवन संगठन के माध्यम से 'स्वच्छता उद्यमी योजना' (एसयूवाई) के तहत सहायता मिली। दो सदस्यों की एक समूह परियोजना के अंतर्गत, उन्हें ट्रैक्टर पर लगे खुले नाले की सफाई करने वाले यंत्र की खरीद के लिए वित्तीय मदद दी गई। इस परियोजना की कुल लागत 16,99,952 रुपए थी, जिसमें 10,24,964 रुपए का ऋण और 6,74,988 रुपए की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी।
मशीनीकृत उपकरणों के उपयोग से सुश्री नंचारम्मा की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सहायता मिलने से पहले उनकी मासिक आय लगभग 8,000 रुपए थी, जो अब बढ़कर लगभग 18,000 रुपए हो गई है। प्रति माह अतिरिक्त 10,000 रुपए की इस कमाई से वे अब अपने घरेलू खर्चों को पूरा करने और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।
इस बदलाव पर सुश्री नंचारम्मा ने कहा कि स्वच्छता उद्यमी योजना की सहायता ने उन्हें पारंपरिक कूड़ा बीनने के काम से आगे बढ़ाकर एक स्थिर आय अर्जित करने में मदद की है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है और उन्हें समाज में आत्मविश्वास और सम्मान मिला है।



