विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 'स्वच्छता ही सेवा-2026' अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने देशव्यापी स्वच्छता अभियान के तहत श्रमदान, वृक्षारोपण और सफाई मित्रों के सम्मान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने 'स्वच्छता ही सेवा (SHS) 2026' अभियान में सक्रिय भागीदारी की है। यह अभियान 17 सितंबर, 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, इसके स्वायत्त संस्थानों और देश भर में स्थित भारतीय सर्वेक्षण कार्यालय के माध्यम से शुरू किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता, साफ-सफाई, सफाई कर्मचारियों के सम्मान और एक स्वस्थ वातावरण के निर्माण में जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
अभियान की शुरुआत में 18 सितंबर, 2026 को विभाग के सचिव द्वारा अधिकारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। इसके बाद प्रौद्योगिकी भवन और विज्ञान सदन जैसी चिन्हित स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (CTU) में विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। राष्ट्रव्यापी पहल 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' के तहत 1 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली के आरके पुरम स्थित विज्ञान सदन में श्रमदान कार्यक्रम हुआ। वहीं, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विभाग के सचिव ने प्रौद्योगिकी भवन के आसपास श्रमदान अभियान का नेतृत्व किया।
सफाई मित्रों के कल्याण और सम्मान के लिए विभाग ने कई विशेष कदम उठाए। 23 सितंबर, 2026 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के सहयोग से हाउस कीपिंग स्टाफ, वैज्ञानिकों और अधिकारियों के लिए एक वित्तीय जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। 29 सितंबर, 2026 को सचिव ने 110 सफाई मित्रों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया। इसी दिन डीएसटी परिसर में सफाईकर्मियों, आउटसोर्स कर्मियों और कर्मचारियों के लिए एक स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया।
पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में, 24 सितंबर, 2026 को सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे और अन्य अधिकारियों ने वृक्षारोपण अभियान चलाया। जागरूकता बढ़ाने के लिए 28 सितंबर को 'स्वच्छता: एक जिम्मेदारी, सिर्फ अभियान नहीं' विषय पर निबंध प्रतियोगिता और 29 सितंबर को 'कबाड़ से कला' रंगोली, चित्रकला और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इसके अतिरिक्त, भारतीय मानक ब्यूरो के आयुष विभाग के वैज्ञानिक डॉ. राघवेंद्र नाइक ने 'आयुर्वेद में मानकीकरण और अनुसंधान: साक्ष्य-आधारित अभ्यास के तरीके' विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। इस पूरे अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संयुक्त सचिव और नोडल अधिकारी श्रीमती ए. धनलक्ष्मी ने देश भर के स्वायत्त संस्थानों और भारतीय सर्वेक्षण कार्यालय के बीच समन्वय स्थापित किया।


