बच्चों में बिस्तर गीला करने की समस्या के समाधान में आयुर्वेद और योग का संयोजन प्रभावी: ITRA अध्ययन
जामनगर स्थित ITRA के अध्ययन में पाया गया कि आयुर्वेदिक औषधि और योगासनों के संयुक्त उपयोग से बच्चों में बिस्तर गीला करने की समस्या में 70 प्रतिशत तक सुधार हुआ है।

जामनगर स्थित आयुष मंत्रालय के संस्थान 'इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद' (ITRA) द्वारा किए गए एक चिकित्सकीय अध्ययन में बच्चों में नींद के दौरान अनजाने में बिस्तर गीला करने की समस्या (जिसे आयुर्वेद में ‘शय्यामूत्र’ कहा जाता है) के प्रबंधन में आयुर्वेदिक औषधि और योगासनों के संयोजन के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
ITRA के कौमारभृत्य विभाग द्वारा किए गए इस 8 सप्ताह के अध्ययन में 6 से 14 वर्ष की आयु के लगभग 38 बच्चों को शामिल किया गया था। अध्ययन के लिए बच्चों को दो समूहों में बांटा गया था। पहले समूह को केवल ‘मेध्य रसायन चूर्ण’ दिया गया, जो ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मुलेठी और गिलोय का मिश्रण था। दूसरे समूह को इसी औषधि के साथ सुबह और शाम चार योगासनों—उत्कटासन, अर्ध-शलभासन, भुजंगासन और शवासन—का अभ्यास कराया गया।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्षों के अनुसार, केवल आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले बच्चों में बिस्तर गीला करने की आवृत्ति में 38 प्रतिशत का सुधार देखा गया, जबकि औषधि और योगासन के संयुक्त उपचार वाले समूह में यह सुधार लगभग 70 प्रतिशत तक रहा। इसके अलावा, संयुक्त उपचार समूह के बच्चों की स्मरणशक्ति में 61 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया, जबकि केवल औषधि लेने वालों में यह 31 प्रतिशत था।
व्यवहार संबंधी सुधारों में, संयुक्त उपचार समूह के बच्चों के चिड़चिड़ेपन में 66 प्रतिशत की कमी आई और नियमित योगाभ्यास करने वाले बच्चों की अत्यधिक सक्रियता (हाइपरएक्टिविटी) में लगभग 71 प्रतिशत की कमी देखी गई। अध्ययन में बच्चों की एकाग्रता और मनोबल में भी सुधार दर्ज किया गया है।
यह शोधपत्र प्रतिष्ठित 'AYU जर्नल' में प्रकाशित हुआ है, जिसे प्रो. वैद्य वीरेंद्र कोरी, वैद्य सागर भिंडे और वैद्य अमीषा बावर्वा द्वारा प्रस्तुत किया गया। ITRA की निदेशक प्रो. डॉ. तनुजा नेसरी ने बताया कि बिस्तर गीला करने की समस्या बच्चों के आत्मविश्वास और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि योगासनों से श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों और शारीरिक-मानसिक समन्वय में सुधार होता है, जबकि आयुर्वेदिक घटक मानसिक शांति और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सहायक होते हैं।
संस्थान ने स्पष्ट किया है कि बच्चों में इस समस्या के उपचार के लिए किसी भी औषधि या योगाभ्यास को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।



