केंद्रीय मंत्री ने आंध्र प्रदेश वन विकास निगम और ओडिशा के बांस किसान को सौंपे देश के पहले 'प्रमाण' सर्टिफिकेट
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारतीय वन और लकड़ी प्रमाणन योजना (IFWCS) के तहत भारत के पहले PRAMAAM प्रमाण पत्र वितरित किए।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में भारतीय वन और लकड़ी प्रमाणन योजना (आईएफडब्ल्यूसीएस) के अंतर्गत देश के पहले पीआरएएमएएएम (PRAMAAM) प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल द्वारा किया गया, जो इस योजना के संचालन निकाय के रूप में कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश वन विकास निगम (एपीएफडीसी) को 33,000 हेक्टेयर क्षेत्र में किए गए वृक्षारोपण के लिए और ओडिशा बांस विकास एजेंसी (ओबीडीए) से जुड़े एक किसान को प्रमाण पत्र दिए गए। इन प्रमाण पत्रों के वितरण से पहले वृक्षारोपण का गहन क्षेत्रीय और प्रबंधन ऑडिट किया गया था। यह पहल दिसंबर 2023 में आईएफडब्ल्यूसीएस के शुभारंभ के बाद नीतिगत प्रारूप से जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की ओर बदलाव को दर्शाती है।
संबोधन के दौरान श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि 'प्रमाण' भारतीय उत्पादकों, निर्यातकों और वन-आधारित उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की वैश्विक नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल एंड एक्ट ग्लोबल' दृष्टिकोण के अनुरूप सतत वन प्रबंधन में भारत को नेतृत्व करने में सक्षम बनाएगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रमाण की प्रत्यायन प्रणाली अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों के अनुरूप है, जिससे घरेलू और वैश्विक खरीदारों द्वारा इन प्रमाणपत्रों को मान्यता मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह प्रमाणन राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता (एनडब्ल्यूपीसी) 2023 के सिद्धांतों पर आधारित है और यह केवल स्व-घोषणा के बजाय तृतीय-पक्ष ऑडिट पर केंद्रित है।
श्री यादव ने 'प्रमाण' को एक आजीविका मिशन बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण और जनजातीय समुदायों, छोटे किसानों और वन-निर्भर समुदायों के लिए प्रीमियम बाजारों तक आय के नए मार्ग खुलेंगे। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों और गैर-लकड़ी वन उत्पादों के प्रसंस्करण में लगे सीमांत भूमिधारकों को इससे लाभान्वित होने की बात कही।
'प्रमाण' (कृषि वानिकी और प्राकृतिक वानिकी संसाधनों के लिए सतत प्रबंधन पद्धतियों की मान्यता और प्रत्यायन हेतु कार्यक्रम) वनों, लकड़ी और गैर-लकड़ी वन उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का पारदर्शी ढांचा है। इसका मूल्यांकन भारतीय वन प्रबंधन मानक के आधार पर किया जाता है। यह प्रणाली राष्ट्रीय प्रमाणन निकाय प्रत्यायन बोर्ड (एनएसीबीबी) द्वारा मान्यता प्राप्त निकायों के स्वतंत्र ऑडिट पर आधारित है, जो भारतीय गुणवत्ता परिषद के अंतर्गत आता है।


