दिल्ली हाट में 'खादी महोत्सव-2026' का शुभारंभ, 115 स्टॉलों में दिखेगी भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत
केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज गोयल ने दिल्ली हाट में विशेष खादी और ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो 15 अक्टूबर तक चलेगी।

भारत सरकार के खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की ओर से आईएनए स्थित दिल्ली हाट में एक विशिष्ट खादी और ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केवीआईसी के अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने किया। यह प्रदर्शनी 15 अक्टूबर, 2026 तक चलेगी।
इस प्रदर्शनी में कुल 115 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें 48 स्टॉल खादी उत्पादों के हैं, जबकि शेष स्टॉल ग्रामोद्योग और पीएमईजीपी (PMEGP) इकाइयों से जुड़े उद्यमियों और कारीगरों के लिए आवंटित किए गए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कारीगरों और खादी संस्थानों की भागीदारी के कारण यह आयोजन 'मिनी इंडिया' का अनुभव प्रदान कर रहा है। उद्घाटन समारोह में केवीआईसी के सीईओ, एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एआरआई), केवीआईसी के वित्तीय सलाहकार सहित अन्य अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि श्री मनोज गोयल ने बताया कि इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी' के संदेश और स्वदेशी आंदोलन के आह्वान को आम जनता और विशेष रूप से जेन-जी (Gen-Z) युवाओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग केवल उत्पादों की बिक्री का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये देश के लाखों बुनकरों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों की आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत की कहानी हैं। उन्होंने दिल्ली के निवासियों और पर्यटकों से स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।
प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्टताएं प्रदर्शित की गई हैं। दक्षिण भारत से कर्नाटक के सिल्क, तमिलनाडु की पारंपरिक बुनाई, आंध्र प्रदेश के कलमकारी, तेलंगाना की इकत और केरल के टेक्सटाइल क्राफ्ट उत्पाद शामिल हैं। पूर्वी भारत से पश्चिम बंगाल की मलमल, बिहार के रेशम और टसर उत्पाद तथा ओडिशा की इकत कला पेश की गई है। पूर्वोत्तर भारत से असम के रेशम और बांस के शिल्प उत्पाद मुख्य आकर्षण हैं। वहीं उत्तर और पश्चिम भारत से गुजरात की टेक्सटाइल परंपराएं, राजस्थान के हस्तशिल्प, हिमाचल के ऊनी उत्पाद, उत्तर प्रदेश की बुनाई, हरियाणा के ग्रामीण उत्पाद और झारखंड व छत्तीसगढ़ के जनजातीय शिल्प प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान श्री मनोज गोयल ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री की नीतियों के कारण इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा और इस क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह कारोबार 2.51 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा।



