पीएम-एजेएवाई: अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) का उद्देश्य एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदायों की गरीबी कम करना और बुनियादी ढांचे में सुधार करना है।

भारत सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के समग्र विकास, सामाजिक-आर्थिक उन्नति और शैक्षिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 'प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना' (पीएम-एजेएवाई) शुरू की है। वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई यह एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
इस योजना का निर्माण तीन पूर्व केंद्र प्रायोजित योजनाओं—प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जातियों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता उप योजना (एससीए टू एससीएसपी) और बाबू जगजीवन राम छात्रवास योजना (बीजेआरसीवाई) के विलय से किया गया है। योजना के त्वरित कार्यान्वयन के लिए सरकार ने 'पीएम-एजेएवाई' पोर्टल और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है।
पीएम-एजेएवाई के तीन मुख्य उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं: पहला, कौशल विकास और आय सृजन के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाकर गरीबी कम करना। दूसरा, एससी बहुल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं में सुधार करना। तीसरा, गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाओं के माध्यम से साक्षरता बढ़ाना और शिक्षण संस्थानों में नामांकन को प्रोत्साहित करना।
योजना के पात्रता मानदंडों के अनुसार, अनुदान सहायता (GIA) के लिए उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है जिनकी वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से अधिक नहीं है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वे गांव पात्र हैं जहां अनुसूचित जाति की आबादी 40% या उससे अधिक है और कुल जनसंख्या 500 या उससे ज्यादा है।
योजना के कार्यान्वयन के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
1. आदर्श ग्राम का विकास: इसके तहत एससी बहुल गांवों को 'आदर्श ग्राम' में बदला जा रहा है। अब तक 47,243 गांवों को इस घटक में शामिल किया गया है, जिससे 47.79 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं। 8 सितंबर 2026 तक 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है और 46,944 विकास कार्य पूरे किए गए हैं।
2. अनुदान सहायता: राज्य और जिला स्तर पर सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक राज्यों को 1,730 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है, जिससे 2.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को कौशल विकास और आजीविका सहायता मिली है।
3. छात्रावास निर्माण: छात्रों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने हेतु छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत की जा रही है। सितंबर 2026 तक 785 छात्रावास पूरे हो चुके हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दो नई छात्रावास परियोजनाओं हेतु 61.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे 264 छात्रों को आवास मिलेगा।
वित्त पोषण के ढांचे के तहत, यह योजना 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है। आवंटित बजट का 50% तक आदर्श ग्रामों के कार्यों के लिए, 5% तकनीकी सहायता समूहों (TSG) और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों (PIU) के लिए, तथा 2% केंद्रीय संस्थानों के छात्रावासों के लिए निर्धारित है। शेष राशि जिला/राज्य स्तर की परियोजनाओं के लिए आवंटित की जाती है।


