भारत में साक्षरता की बड़ी छलांग: देश की कुल साक्षरता दर बढ़कर 81.1% हुई
भारत ने साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें पीएलएफएस 2025 के अनुसार कुल साक्षरता दर 81.1% दर्ज की गई है।

भारत 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जहाँ साक्षरता को राष्ट्रीय विकास की नींव माना जा रहा है। देश ने पिछले आठ दशकों में साक्षरता दर में महत्वपूर्ण सुधार किया है। वर्ष 1947 में देश की समग्र साक्षरता दर केवल 14% थी और महिलाओं की साक्षरता दर 8% थी। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2025 के आंकड़ों के अनुसार, अब देश की कुल साक्षरता दर बढ़कर 81.1% हो गई है।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने साक्षरता को इस प्रकार परिभाषित किया है कि इसमें पढ़ने, लिखने और हिसाब-किताब करने की क्षमता के साथ-साथ डिजिटल और वित्तीय साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल शामिल हैं। विभाग के अनुसार, किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 95% साक्षरता को 'पूर्ण साक्षरता' माना जाता है। इस दिशा में लद्दाख, मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सिक्किम, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2024 और 2026 के बीच खुद को पूरी तरह साक्षर घोषित किया है।
सांख्यिकीय प्रगति पर नजर डालें तो 1951 में साक्षरता दर 18.32% थी, जो 2011 में बढ़कर 74.04% हो गई। PLFS 2025 के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में 7 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की साक्षरता दर 89% और ग्रामीण क्षेत्रों में 77.4% रही। महिलाओं की साक्षरता में भी सुधार हुआ है; ग्रामीण क्षेत्रों में 7 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की साक्षरता दर 70.3% दर्ज की गई है।
सरकार ने साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कई पहल शुरू की हैं। 'उल्लास' (ULLAS) या नव भारत साक्षरता कार्यक्रम उन 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों के लिए है जिनकी औपचारिक शिक्षा छूट गई थी। इस योजना का लक्ष्य ₹1,037.90 करोड़ के बजट के साथ 5 करोड़ शिक्षार्थियों को जोड़ना है। वहीं, 'निपुण' (NIPUN) भारत पहल का लक्ष्य 2026-27 तक यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा दूसरी कक्षा तक बुनियादी साक्षरता और अंकगणित का ज्ञान हासिल कर ले।
अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं में 'समग्र शिक्षा', 'पीएम श्री' (प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया), 'PM e-VIDYA' और 'पीएम पोषण' शामिल हैं। UDISE+ रिपोर्ट (2025-26) के अनुसार, स्कूलों में 24.72 करोड़ से अधिक विद्यार्थी नामांकित हैं। उच्च शिक्षा में भी वृद्धि हुई है, जहाँ नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गया है।
यह प्रगति सतत विकास लक्ष्य (SDG) 4 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य समावेशी और न्यायपूर्ण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार का लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% सकल नामांकन अनुपात (GER) हासिल करना है ताकि एक साक्षर और कुशल जनसंख्या के माध्यम से विकसित भारत के विजन को साकार किया जा सके।



