सरस्वती नगर में आज युवा विकास चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा विद्यार्थी मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सरस्वती नगर, 30 सितंबर: राजकीय आदर्श संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सरस्वती नगर में आज युवा विकास चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा विद्यार्थी मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध उद्योगपति श्री राजेश खरबन्दा जी, श्री सुरेश पाल जी, श्री पिर्थी सैनी जी तथा श्री राकेश मक्कड़ जी उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री सुरेश पाल जी ने बच्चों को जीवन में क्या करें, क्या न करें, शिक्षा के क्षेत्र में कैसे आगे बढ़ें और अपने व्यवहार में किन अच्छी आदतों को अपनाएँ, इन विषयों पर मार्गदर्शन दिया। अपने संबोधन में श्री सुरेश पाल जी ने आईएएस अधिकारी आरती डोगरा की प्रेरक कहानी का उल्लेख किया। लगभग तीन फुट दो इंच कद वाली आरती डोगरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि व्यक्ति की शारीरिक बनावट उसकी प्रतिभा और भविष्य का पैमाना नहीं होती। जीवन में आगे बढ़ने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, शिक्षा, मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास जरूरी हैं। किसी की सफलता का मूल्यांकन उसके कद या बाहरी स्वरूप से नहीं किया जाना चाहिए। आरती डोगरा की उपलब्धि के माध्यम से उन्होंने बच्चों का ध्यान आत्मविश्वास के महत्व की ओर दिलाया। उनके मार्गदर्शन का संदेश था कि विद्यार्थी किसी शारीरिक विशेषता, कठिन परिस्थिति या दूसरों की नकारात्मक टिप्पणी के कारण स्वयं को कमतर न समझें। हर बच्चे की अपनी क्षमता होती है। जरूरत उस क्षमता को पहचानने, उसे विकसित करने और सही दिशा में मेहनत करने की है। अपनी पहचान बनाने के लिए दूसरों की नकल करने से अधिक आवश्यक अपनी योग्यताओं पर काम करना है। इस प्रेरक उदाहरण ने कार्यक्रम के मुख्य विषय को स्पष्ट किया कि कठिनाई सामने आने पर प्रयास छोड़ देना समाधान नहीं है। विद्यार्थी अपनी परिस्थितियों को समझते हुए उपलब्ध अवसरों का उपयोग करें। कोई विषय कठिन लगे तो उससे बचने के बजाय शिक्षक से सहायता लें। किसी परीक्षा में अपेक्षित परिणाम न मिले तो अपनी तैयारी की कमियों को पहचानें। सुधार की प्रक्रिया में धैर्य रखें और सफलता को केवल एक परीक्षा या एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित न मानें। श्री सुरेश पाल जी ने बच्चों को बहाने बनाने की आदत छोड़ने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि जिम्मेदारी से बचने के लिए बार-बार कारण गिनाने से प्रगति रुक जाती है। पढ़ाई के लिए समय निकालना, विद्यालय का कार्य पूरा करना और अपनी तैयारी पर ध्यान देना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है। अपनी कमी स्वीकार करने वाला बच्चा सुधार की ओर बढ़ सकता है, जबकि हर गलती का दोष दूसरों पर डालने से सीखने के अवसर कम हो जाते हैं। स्वयं के प्रति ईमानदारी को उन्होंने जीवन में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बताया। बच्चों को खुद से सच बोलने और अपनी मेहनत का सही आकलन करने का संदेश दिया गया। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि पढ़ाई कर ली है; यह देखना भी जरूरी है कि विषय कितना समझ आया। जो बात समझ में न आए, उसे पूछना कमजोरी नहीं है। अपनी गलती पहचानकर उसे सुधारना सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे आत्मविश्वास मजबूत होता है। माता-पिता के सम्मान पर चर्चा करते हुए श्री सुरेश पाल जी ने विद्यार्थियों को उनकी मेहनत और भावनाओं को समझने के लिए प्रेरित किया। माता-पिता बच्चों की शिक्षा तथा बेहतर भविष्य के लिए अनेक जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। उनके साथ विनम्र व्यवहार करना, उनकी बात ध्यान से सुनना और घर में अपनी जिम्मेदारी निभाना सम्मान के व्यावहारिक रूप हैं। बच्चों को यह सीख दी गई कि अच्छे संस्कार और शिक्षा साथ-साथ चलें, तभी व्यक्तित्व का संतुलित विकास होता है। कार्यक्रम में अच्छे दोस्तों की संगति के महत्व पर भी मार्गदर्शन दिया गया। विद्यार्थियों को ऐसे मित्र चुनने के लिए प्रेरित किया गया जो पढ़ाई, अनुशासन और अच्छे व्यवहार में सहयोग करें। मित्रता का अर्थ गलत काम में साथ देना नहीं, बल्कि एक-दूसरे को बेहतर बनने में मदद करना है। किसी साथी की बात मानने से पहले उसके परिणाम पर विचार करना चाहिए। अच्छी संगति बच्चे को लक्ष्य के प्रति सजग रखती है और गलत आदतों से बचने में सहायता करती है। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नियमित अभ्यास और समय के सदुपयोग का संदेश भी कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के लिए छोटे, स्पष्ट और व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी गई। प्रतिदिन कुछ नया सीखना, पुराने पाठ दोहराना और कठिन प्रश्नों का अभ्यास करना तैयारी को मजबूत बनाता है। आरती डोगरा के उदाहरण से यही बात सामने रखी गई कि उपलब्धियाँ निरंतर प्रयास से बनती हैं और अपनी क्षमता पर विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। युवा विकास चेरिटेबल ट्रस्ट के इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया। श्री सुरेश पाल जी के मार्गदर्शन का केंद्र रहा कि बच्चे माता-पिता का सम्मान करें, स्वयं के प्रति सच्चे रहें, बहाने छोड़ें और अच्छे मित्रों का साथ चुनें। आरती डोगरा की कहानी के जरिए विद्यार्थियों को अपनी परिस्थितियों से निराश होने के बजाय मेहनत और आत्मविश्वास के साथ भविष्य की दिशा तय करने के लिए प्रेरित किया गया।



