चेन्नई के राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान ने 11वें आयुर्वेद दिवस पर शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया
राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान (NIS), चेन्नई द्वारा 18 से 25 सितंबर, 2026 तक आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शैक्षणिक ज्ञान को मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान (एनआईएस), चेन्नई, 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर 18 से 25 सितंबर, 2026 तक शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है। इस सप्ताह भर चलने वाले आयोजन का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाना, अंतःविषय शिक्षा को प्रोत्साहित करना और स्वास्थ्य पेशेवरों, संकाय सदस्यों, छात्रों तथा शोधार्थियों के बीच अकादमिक ज्ञान को सशक्त बनाना है।
कार्यक्रमों की शुरुआत 18 सितंबर को 'त्वचा जागरूकता माह' के अंतर्गत अरुवई, कान, काथू, मूकू, थोंडाई, पाल मात्रम थोल मारुथुवम विभाग द्वारा आयोजित "स्वस्थ त्वचा, मजबूत कल - एक त्वचा विशेषज्ञ संगोष्ठी" से हुई। इसी कार्यक्रम के साथ संस्थान में 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह का औपचारिक उद्घाटन भी किया गया।
संस्थान की गतिविधियों के तहत 21 सितंबर को एनआईएस के संकाय सदस्यों और छात्रों ने अकादमिक बातचीत और संस्थागत प्रदर्शन के लिए तारामणि स्थित वीएचएस अस्पताल परिसर और डॉ. अचंता लक्ष्मीपति क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (एएलआरएआरआई), चेन्नई का दौरा किया। इसके बाद 22 सितंबर को नए बाह्य रोगी विभाग के योग हॉल में "औषधि मानकीकरण के लिए परिष्कृत वाद्य दृष्टिकोण" विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें कैप्टन श्रीनिवास मूर्ति केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीसीआरएएस) के अनुसंधान अधिकारी (रसायन विज्ञान) डॉ. टी. विनोद कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
श्रृंखला के अगले चरणों में 23 सितंबर को "एकीकृत आयुष प्रथाओं के भविष्य के परिप्रेक्ष्य" और 24 सितंबर को "आयुर्वेदिक सिद्धांतों और नैदानिक निदान की अनूठी अवधारणाएं" विषयों पर संगोष्ठियां आयोजित की गईं। इस पूरे कार्यक्रम का समापन 25 सितंबर को आयुर्वेदिक पैरा-सर्जिकल प्रक्रियाओं पर आधारित एक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ होगा।
इन कार्यक्रमों का समन्वय संस्थान के संकाय सदस्यों द्वारा आयोजन समिति के सहयोग से किया जा रहा है। इन गतिविधियों में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी शोधार्थियों सहित संकाय सदस्य सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान इन शैक्षणिक सत्रों और संस्थागत सहयोग के माध्यम से आयुष मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुरूप एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों और आयुर्वेद के प्रति शैक्षणिक जुड़ाव को बढ़ावा दे रहा है।



