UNFCCC COP31: भारत ने जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वैश्विक लचीलेपन और पारस्परिक सम्मान की अपील की
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने COP31 में महत्वाकांक्षी परिणामों के लिए जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और राष्ट्रीय मार्गों के सम्मान पर जोर दिया है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (UNFCCC) के 31वें सम्मेलन (COP31) में शेष मतभेदों को दूर करने और संतुलित परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी सदस्य देशों से अधिक लचीलेपन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान की अपील की है।
फिजी के नाडी में आयोजित 'पूर्व-सीओपी31' (Pre-COP31) बैठक के दौरान केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने राजनीतिक सहमति क्षेत्रों और परिणामों पर आयोजित पूर्ण सत्र को संबोधित किया। श्री यादव ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए अब केवल बयानबाजी के बजाय कार्यान्वयन और समन्वय पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य पर व्यापक सहमति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उच्च महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जलवायु वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में समानुपातिक रूप से उच्च प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता है। भारत का यह दृढ़ विश्वास है कि कार्यान्वयन की प्रक्रिया में प्रत्येक देश के 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मार्गों' (Nationally Determined Pathways) का सम्मान किया जाना चाहिए, ताकि देश अपनी विशिष्ट राष्ट्रीय परिस्थितियों और विकास संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव कर सकें।
श्री यादव ने पेरिस समझौते के तहत उपलब्ध साधनों के अनुकूलन का आह्वान किया और अस्थायी एजेंडा में अनुच्छेद 9.1 को शामिल करने को वित्त समायोजन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। साथ ही, उन्होंने बाजार-संचालित संसाधनों के उपयोग के लिए अनुच्छेद 6 के सहयोगात्मक दृष्टिकोणों के रणनीतिक इस्तेमाल पर जोर दिया।
भारत ने उम्मीद जताई है कि COP31 तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए लक्षित समर्थन बढ़ाने की दिशा में निर्णायक मार्ग प्रशस्त करेगा। श्री यादव ने कहा कि भारत इन मुद्दों को सुलझाने के लिए खुले और पारदर्शी संवाद के लिए तैयार है, ताकि सबसे कमजोर पक्षों के लिए न्यायसंगत और ऐतिहासिक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।
अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने कहा कि फिजी में हुई चर्चाओं के रचनात्मक पहलुओं को तुर्की के अंताल्या तक ले जाना उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने संवाद के लिए नियुक्त अध्यक्ष श्री क्रिस बोवेन को सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि पूर्व-सीओपी एक तैयारी बैठक है, जबकि मुख्य सम्मेलन (COP31) इस वर्ष नवंबर में तुर्की के अंताल्या में आयोजित किया जाएगा।



