इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026: जल सुरक्षा और जलवायु-लचीले जल प्रबंधन के लिए तकनीकी समाधानों पर मंथन
नई दिल्ली में आयोजित 9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक के दूसरे दिन जल सुरक्षा, ग्रेवाटर प्रबंधन और AI-सक्षम समाधानों पर विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक (IIWW 2026) का दूसरा दिन 'क्लाइमेट-रेसिस्टेंट वाटर मैनेजमेंट' की थीम पर आधारित रहा। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जल प्रबंधन के भविष्य, एआई-सक्षम समाधानों और लचीली वॉश (WASH) सेवाओं के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा ने नीदरलैंड के नेतृत्व में आयोजित कंट्री फोरम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन केवल एक इंजीनियरिंग चुनौती नहीं है, बल्कि यह शासन, समुदाय और जलवायु-लचीलेपन की भी चुनौती है। उन्होंने जल जीवन मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि अब ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर टिकाउपन, सेवा की गुणवत्ता और दीर्घकालिक जल सुरक्षा की ओर बढ़ रहा है। श्री मीणा ने 'सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर' और स्रोत स्थिरता के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम जैसी पहलों का हवाला देते हुए भारत-नीदरलैंड सहयोग पर जोर दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रभावी ग्रेवाटर प्रबंधन पर आयोजित एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक सुश्री ऐश्वर्या सिंह ने की। इस सत्र में आंध्र प्रदेश, सिक्किम, बिहार, जम्मू-कश्मीर और झारखंड के अनुभवों को साझा किया गया। सुश्री सिंह ने स्पष्ट किया कि ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए कोई एक समाधान सभी स्थितियों में लागू नहीं होता, बल्कि इसे स्थानीय परिस्थितियों और समुदाय की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित करना आवश्यक है। इस सत्र में बताया गया कि वर्तमान में लगभग 5.46 लाख गाँवों में ग्रेवाटर प्रबंधन की व्यवस्था की जा चुकी है।
समवर्ती रूप से आयोजित दूसरे अंतर्राष्ट्रीय वॉश सम्मेलन में छह मुख्य तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें कुल 25 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों में वॉश के लिए डिजिटल तकनीक, एआई और नवाचार, शासन, सामुदायिक सहभागिता, जलवायु लचीलापन, जल की गुणवत्ता और आर्थिक मॉडलों जैसे विषयों पर चर्चा हुई। शोध पत्रों में बिहार में ग्रामीण स्वच्छता के लिए डिजिटल निगरानी, स्मार्ट वाटर मीटर और एआई-संचालित निर्णय समर्थन प्रणालियों जैसे तकनीकी पहलुओं को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में 'वाटर लीडर्स फोरम' और 'प्रैक्टिशनर्स फोरम' शामिल थे। इसमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और बिहार जैसे राज्यों में सूक्ष्म सिंचाई, सौर पंप और डिजिटल मैपिंग के अनुभवों पर चर्चा हुई। साथ ही, जर्मन दूतावास द्वारा आयोजित एक सत्र में 'भारत के वाटर विजन 2047' को गति देने के लिए भारत-जर्मन सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने मुख्य भाषण दिया और जर्मन राजदूत जैस्पर वीक ने उद्घाटन भाषण दिया।
थिमैटिक फोरम के तहत समावेशी जल शासन, उपचारित अपशिष्ट जल के रीयूज और भूजल रिचार्ज में सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI) द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के प्रभाव को अधिकतम करने के लिए वित्तपोषण और नवाचार पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया।



