डीडीयू-जीकेवाई: ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार के नए अवसर दे रही सरकार
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के माध्यम से जून 2026 तक 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 12.35 लाख को रोजगार मिला है।

ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आय का मुख्य स्रोत खेती है, लेकिन कौशल विकास के माध्यम से अब युवाओं के लिए आमदनी के नए रास्ते खुल रहे हैं। इसी उद्देश्य के साथ 25 सितंबर 2014 को 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (DAY-NRLM) के अंतर्गत 'दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना' (DDU-GKY) की शुरुआत की गई थी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के 15 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं पर केंद्रित है, उन्हें प्लेसमेंट से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करती है।
बदलते समय के साथ इस कार्यक्रम का स्वरूप भी विकसित हुआ है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के नए ढांचे में उद्योग-आधारित प्रशिक्षण, दीर्घकालिक रोजगार, नौकरी के बाद सहायता और कौशल उन्नयन (Up-skilling) पर विशेष जोर दिया गया है। अब पूरी प्रक्रिया जैसे प्रशिक्षण, आकलन, प्रमाणन और निगरानी के लिए एक समग्र डिजिटल प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, कैंपस प्लेसमेंट, रोजगार मेलों और उद्योगों के साथ निरंतर संवाद के जरिए नियोक्ताओं के साथ जुड़ाव को मजबूत किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक इस योजना के तहत 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से 12.35 लाख युवाओं को सफलतापूर्वक रोजगार मिला है।
इस योजना के सकारात्मक प्रभाव विभिन्न राज्यों के युवाओं की कहानियों में दिखते हैं। नागालैंड की विमेथानो सखरी ने पर्यटन और आतिथ्य प्रशिक्षण लेकर बेंगलुरु के 'द डेन' में खाद्य एवं पेय सेवा क्षेत्र में नौकरी पाई। बिहार के सिवान जिले के चंदन शाह ने सहायक इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण लिया और बद्दी में नौकरी करने के बाद अब वे दुबई की 'अल शफा जनरल कॉन्ट्रैक्टिंग' में इलेक्ट्रीशियन के रूप में कार्यरत हैं, जिससे उनकी मासिक आय बढ़कर 35,000 रुपये हो गई है।
वहीं, असम की रूपाली हासदा ने 'सिलाई मशीन ऑपरेटर' का प्रशिक्षण लिया और तमिलनाडु की केपीआर अपैरल मिल्स में काम करने के बाद अपना खुद का सिलाई-कटाई केंद्र खोला, जिससे वे सालाना करीब 1.10 लाख रुपये कमा रही हैं। झारखंड के हीरालाल पंडित, जो दिव्यांग हैं, उन्होंने 'हेल्थकेयर मल्टीपर्पस' ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त किया और नासिक के एसएमबीटी अस्पताल में 'जनरल ड्यूटी असिस्टेंट' के रूप में रोजगार पाया।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डीडीयू-जीकेवाई का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण से रोजगार और फिर एक सुरक्षित एवं टिकाऊ आजीविका की ओर ले जाना है।


