प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम, सत्य और मधुर वाणी के महत्व पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सत्य, मधुर और हितकारी वाणी बोलने का संदेश दिया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत का एक सुभाषितम साझा करते हुए वाणी में अनुशासन और शब्दों के चयन के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने सत्य, मधुर और हितकारी शब्दों के उच्चारण के साथ-साथ समाज में शांति एवं सद्भाव को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक संस्कृत श्लोक साझा किया: "अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥"
इस सुभाषितम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें सदैव ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो सत्य हो, मधुर हो और दूसरों के लिए हितकारी हो, जिससे किसी के मन में अशांति उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पवित्र सद्ग्रंथों का निरंतर स्वाध्याय और चिंतन ही वाणी को वास्तविक सार्थकता प्रदान करता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, विचारपूर्वक बोली गई वाणी समाज में सकारात्मकता, सद्भाव और शांति का संचार करती है।


