दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0: ग्रामीण युवाओं को कुशल और आत्मनिर्भर बनाने की नई पहल
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने DDU-GKY 2.0 के माध्यम से प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार स्थिरता के ढांचे को मजबूत किया है, जिसके लिए बजट 2026-27 में 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रही है। गरीब परिवारों के 15-35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को रोजगार आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाली इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने मई 2025 में 'DDU-GKY 2.0' के उन्नत दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार स्थिरता के ढांचे को मजबूत करना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
संशोधित ढांचे के तहत अब एयरोस्पेस, विमानन, कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, हरित रोजगार, सौंदर्य और कल्याण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना में सामाजिक समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें एससी/एसटी समुदायों के लिए 50 प्रतिशत, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत अनिवार्य कवरेज का प्रावधान है।
विशेष क्षेत्रों के लिए सरकार ने दो प्रमुख कार्यक्रम शुरू किए हैं। 'रोशनी' पहल गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों और आकांक्षी जिलों पर केंद्रित है, जिसमें महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत कवरेज के साथ आवासीय प्रशिक्षण अनिवार्य है। वहीं 'हिमायत' जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक विशेष योजना है, जो बीपीएल और एपीएल दोनों श्रेणियों के युवाओं को कवर करती है और पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है। इसके अलावा, कुल आवंटन का 10 प्रतिशत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है।
DDU-GKY 2.0 के तहत प्रशिक्षण ढांचे को मानकीकृत किया गया है। अब न्यूनतम 576 घंटे के पाठ्यक्रम में 396 घंटे डोमेन प्रशिक्षण और 180 घंटे गैर-डोमेन प्रशिक्षण (अंग्रेजी संचार, जीवन कौशल, डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता) शामिल होंगे। प्लेसमेंट की न्यूनतम अवधि को भी तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है।
रोजगार स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए उम्मीदवारों को छह महीने तक 1,270 रुपये प्रति माह (कुल 7,620 रुपये) की वित्तीय सहायता दी जाएगी। साथ ही, 365 दिनों तक कार्यरत रहने वाले उम्मीदवारों को 5,000 रुपये की प्रतिधारण सहायता प्रदान की जाएगी। प्रवासियों की सहायता के लिए 'प्रवासन सहायता केंद्र' (MSC) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनके वार्षिक वित्त पोषण को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया गया है।
तकनीकी एकीकरण के माध्यम से अब जियो-टैग बायोमेट्रिक उपस्थिति, चेहरा प्रमाणीकरण और रियल-टाइम डैशबोर्ड का उपयोग किया जा रहा है। इस योजना के कार्यान्वयन में गोवा, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर अग्रणी राज्य रहे हैं। अब तक 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से 12.43 लाख का प्लेसमेंट हुआ है। इस दौरान 9.71 लाख महिलाओं को प्रशिक्षण मिला और 6.34 लाख महिलाओं को रोजगार प्राप्त हुआ।



