प्रधानमंत्री मोदी ने महिला और बाल विकास शिखर सम्मेलन में आंगनवाड़ियों को सामुदायिक भागीदारी का केंद्र बनाने का आह्वान किया
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आंगनवाड़ियों के सशक्तिकरण और महिलाओं की सुरक्षा के लिए विभिन्न विभागों के बीच तालमेल पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में महिला और बाल विकास पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा मंत्रियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान पोषण, बचपन की देखभाल, बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्यों के बीच साझा निर्णय लेने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य इस मॉडल को जिला, नगर पालिका और महानगर पालिका स्तर पर 'चिंतन शिविर' आयोजित करके आगे बढ़ा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी विशेष चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया ताकि वे ज़मीनी स्तर के अनुभव और व्यावहारिक समाधान साझा कर सकें।
जन भागीदारी पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को अलग-थलग संस्थान के बजाय सामुदायिक भागीदारी का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय परिवारों को बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन और खिलौने देकर योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से भी आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लेने और सामाजिक प्रभाव से जुड़े अध्ययन करने का आग्रह किया, जिससे छात्रों को योगदान देने और सेवा वितरण को बेहतर बनाने का अवसर मिले। इसमें चिकित्सा विद्यार्थियों के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के स्वयंसेवकों की भागीदारी की भी बात कही गई।
महिलाओं और किशोरियों के विकास पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति बच्चों के लिए उम्र के अनुसार उपयुक्त मॉड्यूल तैयार करने और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बिठाकर रोकथाम के उपाय करने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य और स्वच्छता के संबंध को स्पष्ट करते हुए श्री मोदी ने महिला एवं बाल विकास विभागों से 'स्वच्छता अभियान' की सक्रिय जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बेहतर पोषण और स्वास्थ्य की शुरुआत साफ-सफाई से होती है।
महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने 'वोकल फ़ॉर लोकल' और 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) जैसे राष्ट्रीय आंदोलनों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिला समूह और सामुदायिक संस्थाएं स्थानीय उत्पादों और आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि आज आंगनवाड़ी केंद्रों में विकसित हो रहे बच्चे ही भविष्य में 'विकसित भारत' का निर्माण करेंगे।
