सुगम्य भारत अभियान: एक्सेसिबिलिटी को डिजाइन के स्तर पर ही शामिल करने की जरूरत, DEPwD ने दिया जोर
दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) ने 'सुगम्य भारत' के लिए एक व्यापक सरकारी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है, ताकि बुनियादी ढांचे और सेवाओं को समावेशी बनाया जा सके।

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 'सुगम्यता का संकल्प' परामर्श बैठक में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) की अतिरिक्त सचिव, सुश्री मनमीत कौर नंदा (IAS) ने पूरे भारत में एक्सेसिबिलिटी (पहुंच) को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत और व्यापक सरकारी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक्सेसिबिलिटी को बाद में जोड़ने वाला विचार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि इसे डिजाइनिंग के शुरुआती चरण से ही अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
सुश्री नंदा ने कहा कि एक्सेसिबिलिटी का संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक क्षेत्र में प्रगति दूसरे क्षेत्रों के साथ समन्वित कार्यों पर निर्भर करती है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे एक्सेसिबिलिटी को प्राथमिकता दें और एक समावेशी भारत के सपने को साकार करने के लिए सभी हितधारक मिलकर काम करें।
यह परामर्श बैठक सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण विभाग द्वारा 'द एसोसिएशन ऑफ पीपल विद डिसेबिलिटी' (APD) इंडिया और 'एप्सोस' (EPSOS) के सहयोग से आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 'सुगम्य भारत अभियान' की प्रगति की समीक्षा करना, मौजूदा खामियों की पहचान करना और अगले चरण की प्राथमिकताओं पर विचार करना था।
बैठक के दौरान, DEPwD के संयुक्त सचिव श्री गिरीश सी. हौसर ने सुगम्य भारत अभियान की अब तक की उपलब्धियों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, परिवहन और डिजिटल सेवाओं में विभाग की भूमिका पर प्रकाश डाला। दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त कार्यालय के आयुक्त श्री एस. गोविंदा राज ने कहा कि एक्सेसिबिलिटी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और मौजूदा बाधाओं को दूर करना अनिवार्य है।
एपीडी के अध्यक्ष श्री सबीर हरि सिंह ने सरकार, विशेषज्ञों और दिव्यांगजनों के बीच स्थायी साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में 'एप्सोस' की निदेशक सुश्री तृप्ति शर्मा के नेतृत्व में दो गोलमेज चर्चाएं हुईं, जिनमें एक्सेसिबिलिटी डेटा के उपयोग में आने वाली चुनौतियों और इसके मापन के लिए एक प्रभावी फ्रेमवर्क तैयार करने पर चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, प्रसार भारती और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सरकारों के राज्य आयुक्तों ने भी भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में शुरू किया गया 'सुगम्य भारत अभियान' निर्मित पर्यावरण, परिवहन प्रणालियों और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में पहुंच को बढ़ावा देने की एक राष्ट्रीय पहल है। यह परामर्श बैठक 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के संदर्भ में आयोजित की गई थी। एपीडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुकांतो ऐच ने समापन remarks में कहा कि यह साझा प्रयास सुगम्य भारत के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक उम्मीद की किरण है।
