वैश्विक 6G पेटेंट और मानकों में 10% हिस्सेदारी हासिल करना भारत का लक्ष्य: डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी
केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री ने अगले दशक को 'इंटेलिजेंट इंडिया' बनाने का लक्ष्य रखा है और 6G तकनीक में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया है।

केन्द्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने दूरसंचार उद्योग के हितधारकों को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य के तकनीकी लक्ष्यों को साझा किया। आईएमसी 2026 के दौरान आयोजित "6जी के लिए बुद्धिमान बुनियादी ढांचे का निर्माण: प्रौद्योगिकी नेतृत्व संवाद, सीटीओ गोलमेज सम्मेलन" सत्र में उन्होंने कहा कि पिछला दशक 'डिजिटल इंडिया' का था और अब लक्ष्य अगले दशक को 'इंटेलिजेंट इंडिया' बनाना है।
डॉ. पेम्मासानी ने वैश्विक 6G पेटेंट और मानकों में कम से कम 10% हिस्सेदारी हासिल करने के भारत के लक्ष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रमुख दूरसंचार ऑपरेटरों से आग्रह किया कि वे मानकों, मानक-आवश्यक पेटेंट (SEP) और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के साथ-साथ उद्योग सहयोग के लिए वार्षिक और त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित करें।
स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देते हुए मंत्री ने वर्तमान में आयात की जा रही 10-20 महत्वपूर्ण नेटवर्क प्रौद्योगिकियों की पहचान करने और उनके भारतीय विकल्प विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से चिपसेट, कंपोनेंट निर्माण, रेडियो, राउटर और ऑप्टिकल प्रणालियों के क्षेत्र में स्वदेशी समाधान विकसित करने पर जोर दिया।
दूरसंचार क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने एक अरब से अधिक लोगों को जोड़ा है और लगभग 5.6 लाख बेस ट्रांसीवर स्टेशनों (BTS) के माध्यम से हर जिले को 5G और गांवों को 4G से जोड़ा है। साथ ही, देश ने अपना स्वदेशी 4G स्टैक भी विकसित किया है। उन्होंने भारतनेट और 4G सैचुरेशन परियोजनाओं के माध्यम से हर घर तक हाई-स्पीड फाइबर पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा की।
अनुसंधान और विकास (R&D) की बात करते हुए डॉ. पेम्मासानी ने जानकारी दी कि दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) के तहत लगभग 500 करोड़ रुपये की राशि से 136 परियोजनाओं को वित्तपोषित किया गया है। ये परियोजनाएं 5G, 6G, क्वांटम संचार, गैर-स्थलीय नेटवर्क (NTN) और दूरसंचार सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।
उन्होंने क्वांटम संचार के लिए सी-डॉट (C-DOT) से वास्तविक ऑपरेटर परीक्षण शुरू करने और एआई-सहयोग नेटवर्क से आगे बढ़कर 'एआई-नेटिव नेटवर्क' की दिशा में बढ़ने पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और महत्वपूर्ण दूरसंचार बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।



